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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Podhe piya radhikake | NityaPad-341 | पोढे पिय राधिकाके
संग॥ नवकिशोर और नवकिशोरी गौरश्यामल अंग ॥१॥ स्वच्छ सेज सुगंध
सीतल रत्नजटित पर्यक ॥ दशन खंडित वदनबीरी भरे रतिरस रंग ॥२॥। उपजी
चतुर्भुजदास दुहुंदिश प्रेमसिंधु तरंग ॥ रसिकनी अरु रसिकगिरिधर मुदित जीत
अनंग ॥३॥ | Bihaag |
Nanddham khelat hari dolat . yashomati karati rasoi bheetar | Part1-153 | नंदधाम खेलत हरि डोलत । यशोमति करति रसोई भीतर
आपुन किलकत बोलत ॥१॥ टेरि उठी जसुमति मोहन कहि आवौ चरन
चलाई ॥१॥ बैन सुनत माता पहचानी चले घुटुरुवन धाई ॥२॥ लै उठाय
पे गहि पोंछत सबै धूरि भरी देह । सूरदास जसुमति रज झारत कहाँ भरी यह
हर ॥३॥ | Bilawal |
Nikat zaan tyagyo vahanakon.. vrajbahir rakhyo taahinakon ..1 .. | Part2-091 | निकट जान त्याग्यो वाहनकों॥ व्रजबाहिर राख्यो ताहिनकों ॥१ ॥
सकुचत चल्यो कृष्णके सन्मुख॥ कछू आनंद कछू मनमें दुख ॥२ ॥
धाय चरणन शिरनाई॥ कृपासिंधु राखो शरणाई ॥३ ॥
किये अपराध हु त बिन जा ने॥ प्रभु उठाय लिये मुसिकाने ॥४ ॥
श्रीमुख कह्ो उठो सुरराज॥ वदन उठाय सकत नहि लाज ॥५ ॥
ये दिन वृथा गये वे काज ॥ तुमकों नहि जान्यों त्रजराज ॥६ ॥
सूरश्याम लीनों उर लाई ॥ अशरण शरण निगम यह गाई ॥७ ॥ | Bilawal |
Aaee hoe abahi dekh sughar sunder bhekh thadori larika aeka rupco bavro .. | NityaPad-177 | आई हो अबही देख सुघर सुंदर भेख ठाडोरी लरिका एक रूपको बावरो ॥
परदनी फबत पटुका कंठ फरहरतहे करत उनमान मैन बनत नहि रावरो ॥१॥
नीर जमुना के तीर भरत रही गागर देत जबहि उठाय देखत सब गामरो ||
कृष्णदासनिनाथ नंदनंदन कुंवर हृदय में बसत वर मेरोई सांवरो ॥२॥ | Saarang |
Arrie yahaan shree vrindavanrang .. saa ree gaga maam pa dha nii alaap karat | Part1-359 | एरी यहाँ श्री वृंदावनरंग ।। सा री ग म प ध नि अलाप करत
उपजत अबधर तानतरंग ॥१॥ निर्तत अतजत लेत ग्रग्रतततत धिकट घिलांग
द्रुम बाजत मृदंग ॥ गोविंदप्रभुकेजु अंगअंगपर वारफेर डारों कोटि अनंग ॥२॥ | Bibhas |
Yaa gokulke chohatate rung raachi gwali .. mohan | Part3-141 | या गोकुलके चोहटटे रंग राची ग्वालि ॥ मोहन
खेलें फाग नैन सलोने री रंगराची ग्वालि ॥ नरनारी आनंद भयो ॥ सामलके
अनुराग नैन ॥१॥ दुंदुभी बाजे गहगड़े ॥ मगर कुलाहल होय ॥ उमड्यो
मानस घोखको ॥ भवन रघद्यो नहीं कोय ॥२॥ डफ बांसुरी सुहावनी ॥
आनंद सिंधु मगन भये ॥ देह दशा गई भूल ॥ उदय चंद गोविंदहे युवती
कुमुदिनी फूल ॥ १ ३॥ रस गिरिधारी सों विलसही ॥ बढ्यो हृदय अनुराग ॥
कृष्णदास प्रभु अधरकी ॥| पीवही सुधा बडभाग ॥१४॥ | Aasawari |
Jenvav laal ladili raajen . lalitaadik sakhee sakal parosat kanak-paatr-madhya saajen .| 1.. | NityaPad-031 | जेंवव लाल लाडिली राजें । ललितादिक सखी सकल परोसत कनक-पात्र-मध्य साजें ।| १।।
कर मनुहार जिमावत प्यारो प्यारी जेंबत लाजें।
रसिक प्रीतम तहां करत कलेऊ विविध मनोरथ साजें ॥ २॥ | Malkos |
Nandgrih aayou gerg bidhi jaani ! ramkrishnake naam curran | Part1-137 | नंदगृह आयौ गर्ग बिधि जानी ! रामकृष्णके नाम करन
हित यदुकुल के सनमानी ॥१॥ गजमोतिनके चौक पुराये नामकरन विधि
टठानी । मंगल गीत गावत यशोमति बोलत अमृत बानी ॥२॥ प्रथमही सुनों
बड़े ठोटा के नाम राम बलदेव । हलधर और नाम संकर्षण कोऊ न जाने
भेव ॥३॥ अब यह नाम तुम्हारे सुतके सुनौ चित्त दे नंद | कृष्ण नाम नारायण
केशव है हरि परमानंद ॥४॥ पद्मयनाभ माधों मधुसूदन वासुदेव भगवान ।
और अनंत नाम इनके हैं कहों कहाँ लों आन ॥५॥ नंदसुवन त्रिभुवन के
ठाकुर तिनके नाम धराये । परमानँंद प्रभु अखिल लोकपति गोप वेष धरि
आये ॥६॥ | Ramkali |
Maiyari dohini duhilaaun gaiya .. makhankhay balbhayo | NityaPad-187 | मैयारी दोहिनी दुहिलाऊं गैया ॥ माखनखाय बलभयो
तोहि नंददुहैया ॥ ।१॥ सेंदुर्काजर धूंमरीधौरी मेरी गैया ॥ दुहिलाऊं तुरतहि तब
मोहि करदेघैया ।। २॥ ग्वालनके संग दुहतहों बूझो बलभैया ॥ सूरनिरख जननी
हँसी तबलेत बलैया ॥।३॥ | Bilawal |
Dekhi gangaur piya pyaari navkunj mein aaya baithe byaru curran douu milli saath . | Part2-249 | देखि गनगौर पिय प्यारी नवकुंज में आय बैठे ब्यारू करन दोऊ मिलि साथ ।
विविध पकवान व्यंजन बहो भांति के ठाडी भरि थार लै ललिता अपने हाथ ।।१।॥।
जेंबत आलस भरे देखि चंद्रावलि ढोरत बिजना श्रमित जान वल्लभ नाथ ।
दूध तातो मिष्ट भरि कनकपात्र पियो सचुपाय प्रभु 'कृष्णदास' के हाथ ।।२।। | Kanharo |
Vando pada pankaj whitudlesh .. srivallabh kull deepak | Part3-038 | वंदो पद पंकज विट्उडलेश ॥ श्रीवल्लभ कुल दीपक
सुवेस ॥१॥ जिनकी महिमा जे कहें उदार ॥ अतिजस प्रकट कियो संसार
॥२॥ अनुसरन नीचजेतजि विकार ॥ तिनें भव निधि तरत न लगतवार
॥३॥ करिसारअरथ श्री भागवत प्रमान ॥ किये खंडन पाखंड आन ॥४॥
बांधि मर्यादा समवेद मान ॥ जन दीन उद्धरन सुख निरवान ॥ तिषहिवंस
परम आनंद देन ॥ श्री पुरुषोत्तम सब सुखके एन ॥५॥ | Hindool |
Naval kishore naval mriganayani naval neh terau laag rahauri .. | Part1-262 | नवल किशोर नवल मृगनयनी नवल नेह तेरौ लाग रहौरी ॥
चल चलरी तोय स्याम बुलावत काहे न करत तू मेरी कह्यौ री ॥१॥ सुन राधे
एक बात छबीली आज माँग्यौ हरि तेरी महौ री ॥ छिन छिन बिलंब करत
काहेकों तेरी बिरह नहीं जात सह्यौ री ॥२॥ अधरबिंब राजत कर मुरली राधे
राधे ऐसी नाम लह्यौरी ! आसकरन प्रभु मोहन नागर लेओ न प्रेम रस जात
बह्योगी ॥१॥ | Kanharo |
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