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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Nirtat gopallal tarani tanaya teere ..
Pustak1-331
निर्तत गोपाललाल तरणि तनया तीरे ॥ युवती जन संग दियें मन्मथ मन करख लियें अंग अंग सुखद कियें राजत बलवीरे ॥१॥ लावण्यनिधि गुणआगर कोककला ग्रुण सागर त्रिविध ताप हरत शीतल समीरे ॥ आसकरन प्रभु मोहननागर गुणनिधान संगीतसार रिझवत व्रजवधू नागरि फरकत पट पीरे ॥२॥
Poorvi
Yeh sukh dekho ree tum maaee.. barasganti giritharanlalki
Part1-002
यह सुख देखो री तुम माई॥ बरसगांटि गिरिथरनलालकी बहोरि कुशलसों आई ॥१॥ आगमके दिन नीके लागत उर सुख लहरि उठाई।॥ ऐसी बात कहत बव्रजसुंदरि अपुअपुने मन भाई ॥२॥ फिरि हँसि लेत बलाय कूंखिकी जिहिं जन्में जू कन्हाई ॥ तुमारें पुत्र भयो नंदरनी सब तन तपत बुझाई ॥३॥ नंदकुमार सकल या ब्रजमें आनंद वेलि बढ़ाई ॥ श्री विट्ूठलगिरिधर पूरननिधि सबहिन भूखें पाई ॥४॥
Devgandhar
Kripa tou laalan juu kii chahiye..
NityaPad-355
कृपा तो लालन जू की चहिये।। इने करी करेसो आछी अपने सिरपर सहिये ॥ १॥॥ अपनो दोष विचार सखीरी उनसो कछू न कहिये ॥ सूर अब कछू कहवे की नाहीं श्याम शरण व्हे रहिये ।।२॥॥
Bihaag
Myrie kamalnain shyamsunder jhoolat palana . balalila
Part1-103
माईरी कमलनैन श्यामसुंदर झूलत पलना । बाललीला गावत सब गोकुलकी ललना ॥१)| लालके अरूुन तरुन चरन कमल नखमनि शशि जोती । कुंचित कच भैँमराकृत लर लटकत गजमोती ॥२॥ लाल अँगूठा गहि कमल पान मेलत मुख माँहीं । अपनीं प्रतिबिंब देखि पुनिपुनि मुसिकाई ॥३॥ रानी जसुमतिके पुन्य पुंज बारबार लाले । परमानंद स्वामि गोपाल सुत सनेह पाले ॥४॥
Aasawari
Soothathage daan kaahe naheen lait .. aur atapati chhaadi nandsut kahaa
Part1-220
सूथथगे दान काहे नहीं लेत ॥ और अटपटी छाड़ि नंदसुत कहा कैंपावत बेत ॥१॥ वृंदावनमें बीथनि बीथनि फिरत हो ग्वाल समेत । इन बातन कैसें मन मानें औरन करत अचेत ॥२|| रव करबक मेरौ अँचरा पकरत मारग चलन न देत । अपने मनकी काहे न कहत हो कहा तिहारों हेत ॥३॥ अब काहूकूँ जान न दैहों आन बन्यौ संकेत । सूरदास प्रभु रंग रहसि में देव चले नखरेत. ॥४॥
Devgandhaar
Nandanandan aeka kahoon kahani..
Part2-262
नंदनंदन एक कहूं कहानी॥ रामचंद्रराजादशरथके जनकसुता याके घर रानी ॥१ ॥ तातवचनसुन पंचवटीबन छांडबले ऐसी रजधानी॥।॥ तहां बसत सीता हरलीनी रजनीचर अभिमानी ॥२ ॥ पहिलीं कथा पुरातन सुनसुन जननीके मुखबानी॥ लक्ष्मण धनुषधनुष कहिटेरत यशुमति सूर डरानी ॥३ ।
Bihagaro
Kanhar kheliye hoe baadhyo srinokul mein
Part3-279
कान्हर खेलिये हो बाढ्यो श्रीणोकुल में अनुराग ॥ जानों नहीं बहोरि कब एहें परम भावतो फाग ॥ १॥ बाजत ताल मृदंग झांझ डफ सहनाई ओर ढोल ॥ तुमहं खेली सखा संगले करो आपनी छोल ॥२॥ उतते सबे सखी जुरआई प्रबल मदन के जोर ॥ खेल मच्यो नंदजू की पौरी श्रीराधा नंदकिशोर ॥३॥ तब वृषभान नंदिनी आई लीनी सखी बुलाय ॥ ऐसो मतो करो मेरी सजनी मोहन पकरो जाय ॥४॥ मुरली लेह श्याम के करतें मृगमद वदन लगाय || हलधर की पिचकाई छीनो काजर देहु बनाय ॥५॥ चोवा चंदन मृगमद केसर झोरिन भरो अबीर ॥ सखा बहुत युवतिन परधाये आगें दे बलबीर ॥६॥ लिये अरगजा छिरकत डोलत ब्रज युवतिन के चीर ॥ हलधर की पिचकाई छूटें कोऊन धारे धीर ॥७॥ ब्रज वीथन में स्रेलत डोलें सखा बने संग लाल ॥ गोपी ग्वाल परम कौतुहल गावत गीत रसाल ॥८॥ खेलत-खेलत आनंद बढ्यो रीझे मदनगोपाल ॥ नंददास संग लागी डोलत छब्रिि निरखत ब्रजबाल ॥९॥
Goud Malhaar
Sakhiho alkan beach champakali gangani .. jagamagaat heera
NityaPad-111
सखीहो अलकन बीच चंपकली गनगनी ।। जगमगात हीरा लाल कुल्हे पर पाग चोकरी अति बनी ॥ १॥| सुभग नयन तरुण मदमाते मुसकाते आनअन।॥। गोविंदफप्रभु ब्रजराजकुंवर धन्य धन्यहो धन्य धन्य ॥२॥
Nayaki
Daan maange ree hoe kaanh bansuriwala aaee vrajbala hoe ..1..
Part1-253
दान मांगे री हो कान्ह बांसुरीवाला आई व्रजबाला हो ॥१॥ हाथ लकुटिया कांधे कामरिया हो गौधनके रखवारा ॥आई.॥२॥ मोर मुकुट सिर तिलक बिराजै री हो पीतांबर वनमाला ॥कान्ह.॥३॥ “कृष्णजीवन लछीराम' के प्रभु प्यारे जीवनप्राण हमारा ॥४॥
Peelu
Tein maati que‍yon khaai merey mohan . thaade kahat gope baalik
Part1-141
तें माटी क्‍यों खाई मेरे मोहन । ठाड़े कहत गोप बालिक सब जैहें तेरे गोंहन ॥१॥ मुकरि गये मैं कछु न देखी झूठेई आनि लगाई । दे प्रतीति पसार बदन तब सब बसुधा दरसाई ॥२॥ चक्रत भई जसुमति जिय डरपी मन माया उपजाई । सूरदास प्रभु बाल केलि रस म्हों आई पीराई ॥३॥
Ramkali
Aroon abir jinn daroho lalana dookhat aankhi
Part3-018
अरून अबीर जिन डारोहो ललना दूखत आंखि हमारी ॥ काल्हि गुलाल परचो आंखिनमें अजहू नभई पियसारी ॥१॥ सब सखियन मिलि मतोमत्योहे अबकीबेर देहूं गारी ॥ हाहा खात तेरे पैयां परतिहूं अबहोंचेरी तिहारी ॥२॥ हिलिमिलि खेलो हो पिय हमसों मानों सीख हमारी ॥ धोंधीके प्रभु तुम बहुनायक निसदिन रहत डंकारी ॥३॥
Basant
Sufal bhayori singar kiyo mein piyason rati maani .. dhanya
NityaPad-055
सुफल भयोरी सिंगार कियो में पियसों रति मानी ॥ धन्य घरी धन्य धन्य यह मुहुर्त जात जामिनी ॥ १॥ धन्य सुहाग भाग आजको सजनी कृपाकी दृष्टि चित मो कामनी ॥ परमानंदस्वामी अरसपरस रस सानी ॥२॥।
Malkos
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