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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Shrivrishbhaanaken aaj badhaai . aanedanidhi shobhanidhi sukhanidhi | Part1-191 | श्रीवृषभानकें आज बधाई । आनेदनिधि शोभानिधि सुखनिधि
कीरति कन्या जाई ॥१॥ फूले नरनारी बरसानें घर घर मंगल माई । फूले
नंद यशोदा मनमें फूले कुँवर कन्हाई ॥२॥ फूलीं आँगन नाचत युवत्ती अंगअंग
छबि छाई । फूले रसिक श्रीदामोदर हित आनेंद उर न समाई )!३॥ | Saarang |
Rasik fagu khele naval nagari saun saras | Part3-229 | रसिक फागु खेले नवल नागरि सौं सरस
बर ऋतुराज की ऋतु आँई ॥ पवन मंद अरबिंद औरू कुंद बिकसे विषद
चंद पीय नंदसुत सुखदाँ्ड ॥|१॥ मधुप टोल मृदु बोल सँग सँग डोले पिकन
बोल निरमोल स्रुति चारू गाईं ॥ रचित रास सौं बिलास जमुना पुलिन
में सघन ब्रिंदा बिपुन रही फूलि जाई ॥२॥ कनक अंग बरनी सुकिरनी
बिराजे गिरिधर नब जुबराज गजराज राई ॥ जुबत्ती हंसगामी मिले 'छीत
स्वामी' क््वनित बेैनु पद रैनु बडभाग पाई ॥३॥ | Kafi |
Raani anandason hansi deti | gaamgaamten gyalini aaeen tinco | Part1-042 | रानी आनंद सों हँसि देति | गामगामतें ग्यालिनि आईं तिनको
आदरलेति ॥१॥ ऐसोहूँ दिन करयौ विधाता बहोरि जन्मको आई । हरद दूब
अक्षत थारनमें शोभितकर कर धर लाई ॥२॥ मायथें तिलक करत लालन के
दोहरी बजत बधाई । श्रीविद्डनगिरिधरनलालकौ मुख देखत न अघाई ॥३॥ | Sarang |
Bhalein paaudharen merey angana yashodake chhaganmagana ... | NityaPad-070 | भलें पाउधारें मेरे अंगना यशोदाके छगनमगना ॥।
जो पगधरो मेरी अखियन पर हों बलबलजाऊ न्योछावरकरो हारचीर कंगना ॥। १॥|
कंठमाल सोहे नगन जटित मन मोहे पायन पेजनी सोहे खेलें दोऊ संगना ॥
कल्यानके प्रभु गिरिधरदेखें सुखभयो गयोदुःख दूरभयों मन लगना ॥२॥ | Todi |
Kaho munn shreekrishnasharan ... | NityaPad-351 | कहो मन श्रीकृष्णशरणं ॥।
ममके मिलें अधिक अमृतसुख ऐसे हैं दुखहरणं ।।१॥॥
करो निवेदन सुरत निपटकर परमानंद करणं।।
सेवा सावधान होय साधो अंबर भोग आभरणं।। २॥
दीसत और कछूनहीं कबहूं भवसागर तरणं ॥
श्री विद्वलगिरिधरलालको गहो कमलचरणं ।।३॥। | Bihaag |
Giridhar huttery bhalee banaai.. | Part2-061 | गिरिधर हटरी भली बनाई॥
दौीपावलि हीरा मणि राजत देखें हरख होत अतिभाई ॥१ ॥
अनेक भांत पकवान बनाये अति नौतन व्यंजन सुखदाई ॥
सुंदरभुषण पहेरे सो सोदाकरन लालसों आई ॥२॥
सावधानव्है सोदाकीजे जोदीजे तो ॥
र ाखो चित चंचलनहिकीजे ग्वालिन हँसमुसकाई ॥३ ॥
कैसेंबोली बोलति ग्वालिन कहत यशोदामाई ॥
परमानंदहँसी नन्द घरनी सबे बात में पाई ॥४॥ | Kanharo |
Nandanandan sugharrai mohan bansi bajaai sarigam padhani sapt suran milli gaabai .. | Pustak1-354 | नंदनंदन सुघरराय मोहन बंसी बजाई सारीगम पधनी सप्त सुरन मिलि गाबै ॥
अति अनाधाति संगीत सरस सुर नीके अवघर तान मिलाबै ॥१॥
सुर ध्याय ताल ध्याय नृत्य ध्याय निपुन लघु गुरु तरजति पुलक भेद मृदंग बजाबै ॥|
सूरदास मदन मोहन सकल कलागुन प्रवीन आपुन रिझरिझावै ॥२॥ | Kedaro |
Tihaare busson leho sukumari tum jall maanjh | NityaPad-044 | तिहारे बसन लेहो सुकुमारी तुम जल मांझ
ऊधारी नहाँई दोस लग्यो हे भारी ॥१॥
जलतें न्यारी होओ सबें तुम दोंऊ कर करो जुहारी ।
जब निहपाप होओगी तुम सब ब्रत फल होय कुमारी ॥।२॥
ईतनि सुनत सबेमील निकसी कर प्रणाम जब हारी ॥
सूरदास प्रभु सर्वस लेके बसन दीये गिरधारी ॥।३॥ | Ramkali |
Sharad key doosare dinn manglamein sagabage seey alag praat raas | Pustak1-359 | शरद के दूसरे दिन मंगलामें सगबगे से अलग प्रात रास
वलित ललित गति लटकत ब्रजराज आवें मुकुट डोलनी ॥
घूमत नैंन सरसजाति अरुन रगमगे अरसात मुख जूंभात श्रमजल कण रस झकोलनी ॥|१॥
उरसि चित्र नखहिं घात जात मदन किरन भाँत डगमगात चरन मुक्त माल लोलनी ॥
का छनी कछनी रसाल उपरैना फरहरात बल बल बल केृष्णदास मूदुहास बोलनी | Bibhaas |
Kaanh hamari duhi deeje gaiya... | NityaPad-295 | कान्ह हमारी दुहि दीजे गैया।॥
तुमही जान सतभाय लडैंते नित उठ पठबत मैया ॥१॥
सब कोऊ कहत परम उपकारी संकरषणको भैया ॥
लेहु कमलकर दोहनी नंदनंदन होंहु लेहूं बलैया ॥ २॥।
तुम्हारे दुहेते हमारो पूजत बहुते दूध बहोते घृतघैया ॥।
चतुर्भुजप्रभु कृपा करो हो नित गिरि गोवरधन रैया ॥३॥ | Gori |
Mohan zaan naan dehon . laal teree sukh kii sonj | Part3-303 | मोहन जान न देहों । लाल तेरी सुख की सोंज
सबलेहों ॥ मथ मथ सोंधो धरच्यो भवन में सो अंगन लपटेहूँ ॥ एनिज
संगी सखा तिहारे देखो अबे भजेहूं ॥ १॥ क्यों क्यों कर फागुना दिन आयो
करहूं मनको भायो ॥ छांडो क्यों सुन छेल छबीले सूनी बाखर पायो ॥२॥
यह वाणो अनरागोझीनों पाग रुचिर सुखदायक ॥ ताहीतें हों कहत रंगीले
यह छिरकबे लायक ।।३॥ इतउत हेरत कहा लाडिले चलो गेहके महियां ॥
सूधे सूधे कह्मौ करोकिन नातर गहिटह्दों वढियां ॥४॥ आज सबेरे हों उठबैठी
कुचन कंचुकी दरकी ॥ ओर केसर घोरन में मेरी फरफर भुजद्गबय फरकी
॥५॥ सोडइ अब आन बनीं है प्यारे आगम अगम जनायो ॥ देहन जान
आजानी ब्हेहो यह मूरत निधि पायो ॥६॥ निपुण नागरी गुणन आगरी
पीतांबर गहि लीनो ॥ भर अंकवारी कछुन बिचारी भरक द्वार तबदीनों
॥७॥ कछूक भेद श्रीदामा हू को नातर कहा बल इनको ॥| जित तित फिरत
अकेलो ब्रजमें मिलनियां गोपिन को ॥८।॥| भीतर भीतर करत भामतो सुनियत
कछू किलकारी ॥ चित्र विचित्र झरोखा मोखा चलत निकर पिचकारी ॥९॥
अबीर गुलाल घुमडमडहापर घुमड रही घुमडाई | ऋतु वर्षा वर्षन को बदरी
अरुण श्वेत ब्हे आई ॥१०॥ गोप बृंदमें हलधर ठाडे रोक रहीं निज गोरी ॥
उपरतें कृष्णागर भरभर डारत कनक कमोरी ॥१ १॥ वरण बरण भये वसन
रंगमगे तब दाऊ अकुलाये ॥ तक तब मन जो पाय उपायकें तोक अटा
चढआये ॥१२॥ सुबल उतर धस गयो दोरके कमलनमार मचाई ॥ तिह
अवसर सेना बेनी भई घरमें बहुत लुगाई ॥१३॥ तब अग्ज हस कहत
भैयाहो कहा मतो अब कीजे ॥ दिये दरेर चलो यह खिरकी छूडाय स्याम
को लीजे ॥१७॥ भरभर पिचका फेंटन बंदन कूद परे सब ग्वाला ॥ युवति
यूथ में युवति वेषधर राजत हे नंदलाला ॥ ९ ५॥ वसनगहे तबही करनबला
चपला ज्यौ लपटांई | पकर लये महाबली कहावत भेदत भेदत आंई ॥ १ ६॥
भेख रेख शोभा की सीमा कविपें वरणी न जाई ॥ मांड मांड सुख शिथल
विधल कर भये एक सम भाई ॥१७॥ सब बैठकें वदन सुधारत एक चढ
अटा निहारें ॥ सयनन में पुनटेरदेत हें अंचल हरि परवारें ॥१८।॥ फगु॒ुवा
देन कह्यो मन भायो मेवा बहुत मंगायो ॥ आगेई काज साज रही नींकें,
आब लालन छिटकायो ॥१९॥ छीत स्वामी तिहिं अवसर को सुखः क््योंडूं
कहत न आवे ॥ देखत बावा नंद उजागर मिरिधर बदन ढुरावे ॥२०॥ | Gouri |
Aaj sakhee tohi laagi haye yeh rutt .. govind leh lehu kou govind | NityaPad-108 | आज सखी तोहि लागी हे यह रट ॥ गोविंद लेह लेहु कोउ गोविंद
कहत फिरत वनमें ओघटघट ॥|१॥ दध्िको नाम विसरगयो देखत स्याम सुंदर
ओढ़े पीरोपट॥ मांगत दान ठगोरी मेली चतुर्भुज प्रभु गिरिधरनागर ॥। २॥। | Gori |
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