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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Saajen natwar bhesh gopal ..
Pustak1-334
साजें नटवर भेष गोपाल ॥ मधुर वेणु सुशब्द उघटत तत थेई थेई ताल ॥१॥ तरणि त्नयातीर भरकत श्याम घन गोपाल ॥ ब्रज की नारि समूह मंडल बनी कंचनमाल ॥२॥ रास रसगति निरख उड्पति तजी पश्चिम चाल ॥ चतुर्भुज प्रभु देव गण मन हस्यौ गिरिधरलाल ॥३॥
Malav
Yashumati suta palka podhaave ..
NityaPad-347
यशुमति सुत पलका पोढावे ॥ अरी मेरो सबदिनको बिछुर्‌यो यों कहिके मधुर स्वरगावे । १॥ पोढ़ो लाल कहुं एक कहानी श्रवणसुनत तुमको एक प्यारी ॥ सूरस्याम अतिही मनहरखे पोढरहे सब देतहुंकारी॥२॥
Bihaaagro
Jasomati apanau laal khilaavai prem kii kalolante laad
Part1-155
जसोमति अपनौ लाल खिलावै प्रेम की कलोलनते लाड़ लड़ावै | उबटि मजन कर सिंगार भूकुटि मसि बिंदुका लाय जाहि गावत बेद ताहि चलनौ सिखावै ॥१॥ विश्वभरन शिवकौ शरन जाहि थौँमे गहे हाथ ठुमक ठुमक चलत श्याम नृपुर बजाबै । मणिमय आँगन जगमगाय कदली खंभ रहे छाय साँवरी माधुरी मुरतिकी छबि कहत न आवै ॥२॥ बीजना करत गोपीजन पीत झगुली फरहरात मानों निपट नील घनमें दामिनी दुरावै | तैसेई सोहत सखा संग खेलबेको आनँद रंग कबहुँ हंस चकोर परेवा पकरनकों धावै ॥३॥ कबहुँक उछंग लेत कनिया कर राखे कंठ मनिया पुनि उतार मुख निहार भूषण पट बनावै ॥४॥ बाललीलाकौ महासुख ब्रह्मादिक दुर्लभ भूरि भाग्य नंदघरनि बिना कौन पावै। रामराय प्रभु गिरिधरन कहा न करत हेत ऐसे गोकुलचंदकों भगवानदास गावे. ॥५॥
Bilawal
Sreejmunaji adhamuddhaarani main jaani |
NityaPad-010
श्रीजमुनाजी अधमउद्धारनी मैं जानी | गोधनसंग श्यामघनसुंदर ललितत्रिभंगी दानी ॥१॥ गंगाचरन परसतें पावन हरसिरचिकुर समानी ॥। सात समुद्र भेद यमभागिनी हरि नखशिख लपटानी ॥ २॥| रासरसिकमणि नृत्यपरायण प्रेमपुंजठकुरानी ॥ आलिंगन चुंबन रस विलसत कृष्णपुलिनरजधानी ॥। ३॥ ग्रीष्मऋतु सुखदेत नाथ कुं संग राधिकारानी ॥ गोविंदप्रभुरवितनया प्यारी भक्तिमुक्तिकी खानी ॥।४॥
Ramkali
Llalan kahaan chaley chhip chhip key dharat pug baiyaan pucker moson kahoge baat ..|
NityaPad-118
ल्लालन कहां चले छिप छिप के धरत पग बैयां पकर मोसों कहोगे बात ॥| ऐसी कौन त्रिय सोहागिन भागिन वाही के भुवन तुम रहोगे रात ॥१॥ ऐसी कोन मनमानी मेरी ओर देखो नाहीं काहे को सांची जुठी आय मिलाय सोहे मेरी खात ॥ चतुर बिहारी पिया तुम बहुनायक सांचे बोल करवे को आवोगे प्रात ॥२॥
Iman
Raigiridharan sanga
NityaPad-338
रायगिरिधरन संग राधिका रानी ॥ निबिड नवकुंज नवकुंज शब्यारची नवरंग पियसंग बोलत पिकबानी ।।१॥ नीलसारी लालकंचुकी गौरतन माँगमोतिन खचित सुंदर सुठानी ॥ अर्धघूंघट ललन बदन निरखत रसिक दंपति परस्पर प्रेम हृदयसानी ॥ २॥ लाल तनसुख पाग ढरक भ्रूपर रही कुल्हें चंपकभरी सेहरो सुवानी ॥ पाणिसो पाणि गहि उरसों लावत ललन गोविंदप्रभू ब्रजन॒पति सुरत सुखदानी ॥३॥
Bihaag
Syaam sanga kheleri horry .. pichkai drig sainn
Part3-079
स्याम सँग खेलेरी होरी ॥ पिचकाई दृग सैंन इत उत रैंग प्रीतम को चित चोरी ॥९१॥ उड़ति गुलाल अनुरागनि बादर छयौ री ॥ “ब्रजाधीस' प्रभु गावति बहु धुनि कमल मुखी ब्रज खोरी ॥२॥ ॥२॥
Ramkali
Khlelatvasant balbhadradev | lilaanant koulhenbhiv
Part3-031
ख्लेलतवसंत बलभद्रदेव | लीलाअनंत कोऊलहेनभिव ॥ ध्रु०॥ सनिकादिआदि सुखरचेग्वार || प्रगटकरन ब्रजरजविहार || सुखनिधि गिरिधर धरन धीर || लियोबांटि वांटि ओलिन अवीर ॥१॥ मधुमंगल ओरसुबल सीदाम || सखासिरोमनि करत काम ॥ मधुमंगल आदि सकल ग्वाल ॥ बने सबके शिरोमनि नंदलाल ॥२॥ रचिपचि बहु अंबर बनाय ॥ वामेबहु केसरि रंगाय ॥ रहीपाग लसि सिरसुरंग ॥ कुंबर रसिक मनि श्रीत्रिभग ॥३॥ सुनत चपल सब उठीहेंबाल |॥| भरि भाजन लीने जुलाल हुलसि उठी तजि लोकलाज ॥ लईबोलि सब सखीसमाज ॥४॥ काहूकी कोऊन वदत कान ॥ भरत्ति हितूनकों जानजान ब्रजराज कुंवर वर निकटआय ॥ नैननि सिराय निरखे अघाय ॥५॥ चतुर सखी एक हासकीन ॥ दुरिमुरि बचायद्रण गांठदीन ॥ पाछेंते तारी बजाय ॥ व्याह॒गीत सब उठीं गाय ॥६|॥| तब बोले स्यामघन अपने मेल ॥ खिंच्यो चीर तब लख्यो खेल ॥ लगीलाज चितवें न ओर ॥ सखा कहें आवों गांठ तोर ॥७॥ सुनत बाल तब चलीहैं धाय || बलभद्रबीरकों गद्मोजाय ॥ कटिपटुका पटपीत लीन ॥ भली भांत रंगसमरदीन ॥|८॥| परम पुरुष कोऊ लहेनपार ॥ ब्रजवासिन हित सहतगार ॥ सूरस्याम हंसि कहत बैन ॥ भरति-नैनसुख- बहुत दैन ॥९%
Basant
Aaj laal rasbhare nikunj mandir mein baithe pyarisang ||
NityaPad-228
आज लाल रसभरे निकुंज मंदिर में बैठे प्यारीसंग || करत मदन केलि सुखसिंधु रह्मो झेल कंठ भुजनभुज मेल गावत सुघर दोऊ तान तरंग ॥।१॥ कहारी करोंगे भांवर कुसुमन गूँथी बेनी सीस फूल गजमोती खसितमंग | गोविंदप्रभु चित्रकरत प्यारी के उरपर स्वेद अति वेपथ सकल अंग ॥२॥
Saarang
Atihi kathin kutch oonche douu nitambanise gaadhe urlaayaken menty
NityaPad-145
अतिही कठिन कुच ऊंचे दोऊ नितंबनीसे गाढे उरलायकें मेंटी कामहूक ॥ खेलतमें लर टूटी उरपर पीक परी उपमावलोक बरणत भई पति मूक | १॥ अधरामृत रस ऊपरते अचवायो अंगअंग सुख पायो गयो दुःख दूक |। छीत स्वामी गिरिधारी राजा लुट्यो मन्मथ वुंदावन कुंजनमें में सुनीहे कूक ।।२॥॥
Bibhaas
Sakhiyan seng radhika kunwari beenati kusum daliyaan .. ekahi
Part1-275
सखियन सेंग राधिका कुँवरि बीनति कुसुम दलियाँ ॥ एकही बानिक एक वेश क्रम श्यामबालके हाथन रैंगीली डलियाँ ॥१॥ एक अनूपम माल बनावत एक परस्पर बेंनी गूंथत शोभित कुंद कलियाँ ॥ सूरदास मदनमोहन आय अचानक ठाढ़े भये मानी हे रँगरलियाँ ॥२॥
Gori
Aaj atee neeke baneri gopal ..
NityaPad-287
आज अति नीके बनेरी गोपाल ॥ खासाको कटि बन्यो है पिछोरा उर मोतिनकी माल ॥१॥ पाग चौकरी सीस बिराजत चंदन सोहत भाल । कुंडल लोल कपोल बिराजत कर पहोंची वनमाल ॥२॥ धेनु चराय सखन संग आवत हाथ लकुटिया लाल ॥ परमानंद प्रभुकी छबि निरखत मोहि रही ब्रजबाल ॥३॥
Hameer Kalyan
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