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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Makhan tanak deree maay .. tanak karpar tanak rotty maagat | NityaPad-029 | माखन तनक देरी माय ॥ तनक करपर तनक रोटी मागत
चरणा चलाय ॥| १॥ तनक से मनमोहना की लागो मोहिं बलाथ ।। तनक मुखमें
दूधकी दतियां बोलतहे तुतराय ॥२॥| कनक भूपर तनक रींगत नेत पकर्यो
धाय | कंपियो गिरी शेष संक्यों सिंधु अति अकुलाय |। ३॥ तनक माग्यो बहोत
दीयो लियो कंठ लगाय | सूरप्रभुकी तनक चुटिया गुहत माय बनाय ॥।४॥ | Ramkali |
Nrityamaan rasrang kaanh sanga ghoshnar gidgidtatheithei navabilasani .. | Pustak1-345 | नृत्यमान रासरंग कान्ह संग घोषनार गिडगिडततथेईथेई नवबिलासनी ॥
बदनजोति मोहत नभ सघन चंद रूपरस बामबाहु नाथ अँस ईषद हासनी ॥१॥
बीच बीच सुरतकेलि जानों तमाल कनकबेलि अरुझ रही अंगअंग बिगतबासनी ॥
कृष्णदास प्रभु गिरिधर अधरामृत रंगराची भुवि बिलास मत्त मदन गर्वनासिनी ॥२॥ | Kanharo |
Aaj mohi aagam agam janaayo .. | NityaPad-153 | आज मोही आगम अगम जनायो ॥
सोंधों छानी अरगज़ाचंदन आंगन भवन लीपायों॥ १॥।
आगम आवन जान प्रीतम कों गोपीजन मंगलगायो ॥
आनंद उर न समाय सखी नव साजि सिंगार बनायों ॥२॥
तन सुखपागपिछोरा झीनो केसर रंग रंगायो ॥
मुक्ता के आभूषन गुही मनी पहिरावतहुलसायो ॥। ३॥
पंखा बहु सिर प्रीतम को, नित राखुंगी छिरकायों ॥।
ग्रीषम ऋतुसुख देति नाइक यह औसर चलि आयो।।
आबेंगे महेमान आज हरि भाग्य बडेदिन पायों॥
कुंभनदास' नव नेह नई ऋतु आगम सुजस सुनायों ॥४॥। | Bilawal |
Kamal nayan kamalapati tribhuvan key naath .. | NityaPad-362 | कमल नयन कमलापति त्रिभुवन के नाथ ॥
एक प्रेमतें सबबने जो मन होवे हाथ ॥१॥
सकल लोककी संपदा ले आगें धरिये ।|
भक्तिविना माने नाहि जो कोटिक करिये ॥२॥
दास कहावन कठिनहै जोलों चितराग ॥
परमानंदप्रभुसांवरो पैयत बडभाग ॥३॥ | Bihaag |
Houn haridasvaryapen baari ..| | NityaPad-355 | हों हरिदासवर्यपें बारी ॥|
शीतल झरना झरत निरंतर पवन सुगंध परम सुखकारी ॥१॥
वृंदावन के परम मुकुटमणि भक्तजननके अति
हितकारी ॥ नंदनंदन क्रीडत निशवासर संग शोभित वृषभान दुलारी ॥२॥।
नित श्रीवल्लभ विट्ठल राजत कोटि कला प्रगटे अवतारी॥।
भजनानंद देह निजदासन पूरण काम त्रयताप निवारी ॥३॥
जे जन क्षणभर रहत तरेहटी जाकी कथा को कहे विस्तारी॥
ज्ञान बैराग्य ताकी रज चाहत संग डोलतहे मुक्ति विचारी |।४॥
पूरण भाग्य पुलिंदिननको विमल कथा शुक व्यास विचारी ॥
रसिकदास जन यह मांगत है जन्म जन्म इनको अनुसारी ॥५॥ | Bihaag |
Arbillo garvilo rangilo chhabilo kaanh curry key singar thaadhau dekho sakhee kunjdwar. | Part2-245 | अरबीलो गरवीलो रंगीलो छबीलो कान्ह करि के सिंगार ठाढौ देखो सखी कुँजद्वार।
वाम भाग राधा प्यारी ओढे चुनरी की सारी कंचुकी उतंग गाढी ठाडी बहियाँ गरे डार ॥१ ॥
चूनरी चटकदार पाग सीस नंदलाल सूथन चूनरी बागो बन्यो अंग घेरदार ॥२ ॥
फूल-छरी बेनु धरी बजत है रस भरी सुनत स्रवन धाय आये सब नर नगरा।
निरखि मुखारविंद फूले मानो अरविंद करत गुँजार तहाँ 'कृष्णदास' भमरा ॥३ ॥ | Saarang |
Mohan madan gopal kii aarti. | NityaPad-223 | मोहन मदन गोपाल की आरती।
आरती और न जाऊं लाल हों तुम पर सर्वस्व॒ वारती ॥१॥
घंटा ताल मूदंग झालरी, बेनु रवाव बजावति॥
कृष्णदास रस भरी राधिका रहे
इकटक कबहु आपुनयो संभारती॥२॥ | Saarang |
Jhulau paalnen nandananda | kham khaun kham khh choora baaje manmein atee | Part1-097 | झुलौ पालनें नंदनंदा | खं ख॑ं खं ख॑ चूरा बाजे मनमें अति
आनंद ॥॥१॥ टुं टुं टुं ठुं घुंघरू बाजें तननतननसी बंदी । नेन कटाक्ष चलावत
गिरिधर मंदमंद मुख हँसी ॥२॥ खट खठट खट खट लकुटी बाजै चटक चटक
बाजै चुटकी । नंद महर घर सोभा निरखत मोहन मनमें अटकी ॥३॥ कुहु
कुहु कुहुु कुहु कोकिल बोलें झनन झनन बोलें भोंरा | पी पी पी पी पपैया बोलें
संगीत सुर दौरा ॥४॥ झू झूझूसूझुनझुन बाजै फिरक फिरक फिरे फिरकी।
गुडगुडगुडगुडगुडकी बाजें प्रेम मगन मन नि रखी ॥५॥ ढो ढो ढो ढो ढोलक
बा गुनन गुनन गुन गावें । राधा गिरिधरकी बोनिक पर रसिकदास बलि
जावें ॥६॥ | Ramkali |
Jaya jaya jaya srivallabhnath .. sakal padarath jaake haath .. 1.. | NityaPad-002 | जय जय जय श्रीवललभनाथ ।। सकल पदारथ जाके हाथ ।। १॥
भक्तिमार्ग जिन प्रकट कर॒यो | नामविश्वास जगत उद्धरूयो |२॥
सब मत खंड निरूपे वेद ॥ प्रेमभक्तिको जान्यो भेद ॥३॥
कारण करण समरथ भुजदंड ॥॥ मायावाद कियो मत खंड ।।४॥
परमपुरुष पुरुषोत्तम अंशी ॥ भक्तजनन मनकरत प्रशंसी ॥५॥।|
जाके नाम गुण रूप अनंत ॥ निर्मल यश गावत श्रुति संत ॥६॥।
सुंदरस्थाम कमलदललोचन || कृपाकटाक्ष भक्तभबमोचन ।।७॥
कामनापूरण प्रणकाम ॥ अहर्निश जपूं तिहारो नाम ॥८॥
जाके पटतर ओर न कोय ॥ दास गोपाल भजें सुख होय ॥।९॥ | Bhairav |
Baat hilagaki kaason kahiye sunariskhri vyavastha | NityaPad-090 | बात हिलगकी कासों कहिये सुनरीसख्री व्यवस्था
यातनकीसमझसमझमन चुप कररहिये ॥१॥
मरमीविना मरमको जानें यहउपहासजान जगसहिये।।
चतुर्भुज प्रभुगिरिधएनमिलेंजबतबही सबसुख पैये ॥ २॥॥ | Bilawal |
Suva padhawat sarang nayani .. badan sanket | NityaPad-226 | सुवा पढावत सारंग नयनी ॥ बदन संकेत
लालगिरिधरसों गरजत गुप्त निकट मत केनी ॥॥१९॥ अहो कीर तुम नीलबरण
तन नेक चितें मन बुद्धि हरलेनी ॥ होत अवेर जात दिन वन गृह हम तुम भेट
होयगी गेनी ॥२॥ जब लग तुम जो सिधारो सघनबनहों जुगई यमुनाजल
लेनी ॥ परमानंद लालगिरिधरसो मृूदु मृदुबचचन कहत पिकबैनी ॥॥३॥ | Saarang |
Gwalin gharaten kaun bulaai .. jaay jimaavo apane patiko | NityaPad-208 | ग्वालिन घरतें कौन बुलाई ॥ जाय जिमावो अपने पतिको
यहां क्योंरी तुम आई ॥१॥ यह मर्यादा वेदकी नाही करो अपनी मन भाई ॥
निज पति छांड औरनको चाहत यह तुम कौन बताई ॥२॥। दीन बचन ग्वालिन
बोली हम सुत पति छांडके आई ॥ जान्यो मनमोहन भूखे हैं अखिल लोकके
राई ॥३॥ वचन सुनत मोहन मुसकाने कर गहि हदें लगाई ॥ दोऊ संग मिली
छाक अरोगत दास निरख बलि जाई ॥४॥ | Saarang |
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